Accounts Security लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Accounts Security लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

भारत ने धोखाधड़ी और दुरुपयोग को रोकने के लिए मैसेजिंग ऐप्स को सिर्फ़ एक्टिव सिम कार्ड के साथ काम करने का आदेश दिया है

 


भारत के दूरसंचार विभाग (DoT) ने नई गाइडलाइन जारी की — अब मैसेजिंग ऐप बिना एक्टिव सिम के इस्तेमाल नहीं होंगे

भारत के Department of Telecommunications (DoT) ने ऐप-आधारित कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब WhatsApp, Telegram, Snapchat, Signal जैसे ऐप बिना यूज़र के मोबाइल नंबर से जुड़े एक्टिव SIM के उपयोग नहीं किए जा सकेंगे।

DoT ने इन ऐप्स को 90 दिनों के अंदर इन नियमों का पालन करने का आदेश दिया है।

यह बदलाव Telecommunications (Telecom Cyber Security) Rules, 2024 में संशोधन के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में होने वाले फिशिंग, ऑनलाइन स्कैम, और साइबर फ्रॉड को रोकना है। सरकार का कहना है कि अपराधी दूरसंचार पहचान (mobile number) का दुरुपयोग कर रहे हैं, खासकर क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉड करने के लिए।


क्यों ज़रूरी हुआ SIM-Binding नियम?

DoT के अनुसार:

  • मैसेजिंग और कॉलिंग ऐप्स के अकाउंट्स SIM हटाने, बंद होने या विदेश ले जाने के बाद भी चलते रहते हैं

  • इससे अपराधियों को मौका मिलता है कि वे भारत के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके गुमनाम तरीके से धोखाधड़ी करें

  • “डिजिटल अरेस्ट”, सरकारी विभाग बनकर कॉल करना, निवेश धोखाधड़ी, आदि ज्यादातर ऐसे ही नंबरों से किए जाते हैं

  • वेब/डेस्कटॉप पर लॉन्ग-सेशन चलने से अपराधी मूल SIM या असली डिवाइस के बिना भी अकाउंट कंट्रोल करते रहते हैं

सरकार का कहना है कि एक बार भारत में QR-Code से लॉगिन करने के बाद, ऐसी वेब सेशन लगातार चलते रहते हैं, जिससे फ़्रॉड को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।


नए नियमों में क्या-क्या शामिल है?

सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार—

 1. ऐप हमेशा डिवाइस में मौजूद एक्टिव SIM से लिंक रहना चाहिए

  • ऐप तभी चले जब फोन में उसी नंबर का SIM कार्ड ऐक्टिव और मौजूद हो

  • SIM हटते ही ऐप अपने आप बंद होना चाहिए

 2. वेब/डेस्कटॉप लॉगिन हर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट होगा

  • हर 6 घंटे बाद दोबारा QR कोड से लॉगिन करना होगा

  • इससे अपराधियों को बार-बार अपनी पहचान साबित करनी पड़ेगी, जिससे धोखाधड़ी करना मुश्किल होगा

 3. हर अकाउंट सिर्फ KYC-वेरिफाइड SIM से ही चल सकेगा

  • यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी भारतीय नंबर बिना असली पहचान के किसी भी घोटाले में इस्तेमाल न हो सके

  • सरकार नंबरों को ट्रेस कर पाएगी जो फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, लोन स्कैम आदि में उपयोग होते हैं


यह नियम पहले किन ऐप्स पर लागू था?

यह SIM-बाइंडिंग और ऑटो-लॉगआउट सिस्टम पहले सिर्फ—

  • बैंकिंग ऐप्स

  • UPI ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm)

पर लागू था।

अब यह मैसेजिंग ऐप्स पर भी लागू होगा।

WhatsApp और Signal ने इस बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।


Mobile Number Validation (MNV) प्लेटफ़ॉर्म भी आएगा

कुछ दिन पहले DoT ने घोषणा की थी कि एक नया Mobile Number Validation (MNV) प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य—

  • म्यूल अकाउंट रोकना

  • पहचान धोखाधड़ी रोकना

  • मोबाइल नंबर और डिजिटल सर्विस के बीच असली लिंक की पुष्टि करना

यह सत्यापन TIUE (Telecom Identifier User Entity) या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि यह सिस्टम:

✔️ डिजिटल ट्रांजेक्शन में भरोसा बढ़ाएगा
✔️ मोबाइल नंबर के गलत उपयोग को रोकेगा
✔️ पूरी प्रक्रिया प्राइवेसी-फ्रेंडली रहेगी

AI का डार्क साइड: कैसे हैकर्स AI का इस्तेमाल करके अटैक कर रहे हैं और आप कैसे बचें

  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि साइबर क्राइम का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। जहां एक तरफ AI हमारी सिक्योरिट...